याद आते है वो दिन जब...



याद आते है वो दिन जब कलम नहीं था हाथ में
पेन्सिल से लिखा करते थे;
बचपन था ऐसा वो जब गलतियाँ भी हम -
रब्बर से मिटाया करते थे

अब तो -
कलम से लिखा गया मिटाते मिटता नहीं,
आंसुओं से भले ही धुंधले हो जाए अक्षर ...
उनके निशान मगर दिल से मिटते नहीं.




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लिखो कुछ ऐसा के जिससे अपनेपण की खुशबू आये

मुहोब्बत के एहसास को
शब्दों में लिख रही हूँ
दिल की धडकनों की आवाज़
आप सब को सुना रही हूँ

***
एक ख्वाब हूँ मैं टूटा हुआ
एक ज़ख्म खरोंचा हुआ
एक लम्हा गुज़रा हुआ
एक आंसू छलका हुआ
एक एहसास दिल में दबा हुआ
एक ख्याल मन में छिपा हुआ

***
लबों की खामोशी भी
सुनाती है दास्ताँ कोई
हर मुस्कराहट के पीछे
छिपा है अश्क कोई