हसने की बात ना करो...



हसने की बात ना करो हमसे
हमने जाने कब से टूटे ख़्वाबों का बोझ उठाया है
मुस्कुराना है जिंदगी, हमें भी पता है
इसीलिए तो अश्कों को छिपाया है

तुम क्या जानो  गहराइयों में दिल के -
क़ैद है जाने कैसे कैसे अरमान कई
के उस जगह को तो हमने खुद से भी छुपाया है.




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लिखो कुछ ऐसा के जिससे अपनेपण की खुशबू आये

मुहोब्बत के एहसास को
शब्दों में लिख रही हूँ
दिल की धडकनों की आवाज़
आप सब को सुना रही हूँ

***
एक ख्वाब हूँ मैं टूटा हुआ
एक ज़ख्म खरोंचा हुआ
एक लम्हा गुज़रा हुआ
एक आंसू छलका हुआ
एक एहसास दिल में दबा हुआ
एक ख्याल मन में छिपा हुआ

***
लबों की खामोशी भी
सुनाती है दास्ताँ कोई
हर मुस्कराहट के पीछे
छिपा है अश्क कोई