एक ख्वाब संभालकर रखा है


एक ख्वाब संभालकर रखा है - तकिये के नीचे
पलकों पे सजा लेती हूँ जब मन करता है ...
कभी यूँ ही दूर से तकती रहती हूँ...
लबों पे मुस्कराहट लाता है वो ख्वाब -
कभी आँखें नम कर जाता है -
अपना-सा लगता है मुझको ...
दुनिया से छिपाती हूँ
एक ख्वाब संभालकर रखा है - तकिये के नीचे


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लिखो कुछ ऐसा के जिससे अपनेपण की खुशबू आये

मुहोब्बत के एहसास को
शब्दों में लिख रही हूँ
दिल की धडकनों की आवाज़
आप सब को सुना रही हूँ

***
एक ख्वाब हूँ मैं टूटा हुआ
एक ज़ख्म खरोंचा हुआ
एक लम्हा गुज़रा हुआ
एक आंसू छलका हुआ
एक एहसास दिल में दबा हुआ
एक ख्याल मन में छिपा हुआ

***
लबों की खामोशी भी
सुनाती है दास्ताँ कोई
हर मुस्कराहट के पीछे
छिपा है अश्क कोई