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रंग
Published by Arti Honrao
October 15, 2010
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अपणे जैसी लागू णा मैं अब तो...
म्हारे पे रंग चढेया साजण का
उठू उस जैसे बैठू भी
रंग ढंग भी साजण से
आयने में भी वो ही दिखे है
म्हारा चेहरा झलके णा
कैसी थी मैं अब मैं जाणू णा
म्हारे पे रंग चढेया साजण का!
रंग
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मुहोब्बत के एहसास को
शब्दों में लिख रही हूँ
दिल की धडकनों की आवाज़
आप सब को सुना रही हूँ
***
एक ख्वाब हूँ मैं टूटा हुआ
एक ज़ख्म खरोंचा हुआ
एक लम्हा गुज़रा हुआ
एक आंसू छलका हुआ
एक एहसास दिल में दबा हुआ
एक ख्याल मन में छिपा हुआ
***
लबों की खामोशी भी
सुनाती है दास्ताँ कोई
हर मुस्कराहट के पीछे
छिपा है अश्क कोई
कुछ और ...
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