एक ख्वाब संभालकर रखा है


एक ख्वाब संभालकर रखा है - तकिये के नीचे
पलकों पे सजा लेती हूँ जब मन करता है ...
कभी यूँ ही दूर से तकती रहती हूँ...
लबों पे मुस्कराहट लाता है वो ख्वाब -
कभी आँखें नम कर जाता है -
अपना-सा लगता है मुझको ...
दुनिया से छिपाती हूँ
एक ख्वाब संभालकर रखा है - तकिये के नीचे


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मैं मेरी कहानी सुनाती रही

मैं मेरी कहानी सुनाती रही
वो अपने गीत गाता रहा
रातभर बारिश होती रही
छत से आँसू टपकता रहा

आवाजें कहीं दूर से आती रही
पास का सन्नाटा डराता रहा
उसके लबों पे मुस्कराहट सजी रही
मेरे चेहरे का गम छिपा रहा

मैं मेरी कहानी सुनाती रही
वो अपने गीत गाता रहा

उसकी कही हर बात दिल तक पहुँचती रही
मैंने लिखा आँखों का अश्क मिटाता रहा
मैं अपने हाथों की लकीरों को देखती रही
वो मेरा हाथ पकड़ने की कोशिश करता रहा

रातभर बारिश होती रही
छत से आँसू टपकता रहा

खुशियाँ दस्तक देती रही
गम डेरा डाले बैठा रहा
दिलों में दुरी कायम रही
साँसों का संगीत गूंजता रहा

मैं मेरी कहानी सुनाती रही
वो अपने गीत गाता रहा
रातभर बारिश होती रही
छत से आँसू टपकता रहा

- आरती होनराव
०७/१२/२०१० - २३:५५


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मुहोब्बत के एहसास को
शब्दों में लिख रही हूँ
दिल की धडकनों की आवाज़
आप सब को सुना रही हूँ

***
एक ख्वाब हूँ मैं टूटा हुआ
एक ज़ख्म खरोंचा हुआ
एक लम्हा गुज़रा हुआ
एक आंसू छलका हुआ
एक एहसास दिल में दबा हुआ
एक ख्याल मन में छिपा हुआ

***
लबों की खामोशी भी
सुनाती है दास्ताँ कोई
हर मुस्कराहट के पीछे
छिपा है अश्क कोई