February 6, 2012

सफर है तन्हा

बातें करते हैं सभी, काम कोई आता नहीं ...
सफर है तन्हा अपना, साथ कोई देता नहीं.

चलो, गिरो, गिरकर खुद संभल जाओ
कोई उठाएगा तुम्हे उम्मीद ये करना नहीं...
सफर है तन्हा अपना, साथ कोई देता नहीं.

अपने अपने झमेले है, गुम है दुनिया सारी अपने ही झमेलो में
पड़ी है हथकडियां सभी के हाथों में ...
कोई तुम्हारी हथकड़ी छुडाये उम्मीद ये करना नहीं.
सफर है तन्हा अपना, साथ कोई देता नहीं.

चलो, गिरो, गिरकर खुद संभल जाओ
कोई उठाएगा तुम्हे उम्मीद ये करना नहीं.
बातें करते हैं सभी, काम कोई आता नहीं.



1 comments:

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